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मऊ से संबंधित उमराव सिंह कई ऐतिहासिक हस्तियाँ हैं, जिनमें बाबू उमराव सिंह (मऊ के पूर्व सांसद और स्वतंत्रता सेनानी), विक्टोरिया क्रॉस प्राप्त करने वाले उमराव सिंह यादव (द्वितीय विश्व युद्ध के नायक), और टिकैत उमराव सिंह (1857 के क्रांतिकारी) शामिल हैं; मऊ के संदर्भ में बाबू उमराव सिंह का नाम आता है जो गांधीवादी विचारधारा के व्यक्ति और शिक्षा के समर्थक थे, जबकि अन्य दो अलग-अलग क्षेत्रों से हैं, लेकिन तीनों ही भारतीय इतिहास में वीरता और योगदान के लिए जाने जाते हैं।
बाबू उमराव सिंह (मऊ, उत्तर प्रदेश)
पहचान: मऊ (घोसी लोकसभा क्षेत्र) के पूर्व सांसद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जिला बोर्ड के चेयरमैन रहे।
योगदान: गांधीवादी विचारधारा के व्यक्ति, शिक्षा और समाज सेवा पर विशेष ध्यान देते थे। उन्होंने पिछड़े इलाकों में विकास की ज्योति जलाई।
स्मरण: उनकी पुण्यतिथि पर मऊ के रानीपुर में श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की जाती हैं और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण होता है।
उमराव सिंह यादव (विक्टोरिया क्रॉस विजेता)
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रॉयल आर्टिलरी में हवलदार, जिन्हें दुश्मन के सामने वीरता के लिए सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस मिला।
वे विक्टोरिया क्रॉस पाने वाले अंतिम जीवित भारतीय थे, जिन्होंने यह सम्मान देश को समर्पित किया और इसे बेचकर अपने साथियों के बलिदान का अपमान करने से इनकार कर दिया।
टिकैत उमराव सिंह (झारखंड के क्रांतिकारी)
1857 की क्रांति के प्रमुख सेनानायकों में से एक, जो छोटानागपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े और अपने दीवान शेख भिखारी के साथ फाँसी पर चढ़े।
रांची पर अंग्रेजों को कब्जा करने से रोका और चुटुपाल घाटी में प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
मुहम्मदाबाद गोहना। प्रदेश में 19 फरवरी 1962 को तीसरी विधानसभा के लिए आम चुनाव हुआ था। चुनाव में मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के नामचीन नेता व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमराव सिंह मैदान में थे, तो दूसरी तरफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की से चंद्रजीत यादव उनके खिलाफ खड़े थे। कांग्रेस के रसूख और उमराव सिंह की लोकप्रियता को देखते हुए सभी को उमराव सिंह के जीत का विश्वास था। लेकिन उनकी हार के चलते यह काफी दिनों तक क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा। उस चुनाव के लिए विधानसभा क्षेत्र में कुल 96,031 मतदाता शामिल थे जिसमें 50,786 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। कुल 52.89 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। परिणाम आया तो उमराव सिंह 5,133 मतों से चुनाव हार गए। उमराव सिंह के कद और पद को देखते हुए लोगों को उनकी हार का विश्वास नहीं हो रहा था। चंद्रजीत यादव को कुल 15,278 मत मिले जबकि उमराव सिंह को 10,145 मत ही प्राप्त हुए थे। इस दौरान कुल 2,559 मत खराब घोषित हो गए थे। उस चुनाव में उमराव सिंह की हार आजमगढ़ जनपद में चुनाव की प्रमुख सुर्खी बनी रही थी। परिणाम को लेकर काफी दिनों तक चर्चा होती रही। इसी चुनाव के बाद साल 1967 से मुहम्मदाबाद गोहना को सुरक्षित विधान सभा घोषित कर दिया गया जो अभी तक सुरक्षित की श्रेणी में शामिल है।